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Dark Web kya hai aur kaise kam karta hai?

आज हम बात करेंगे Dark web kya hai aur kaise kam karta hai? what is dark web and how does it work? हम सभी जानते हैं कि इंटरनेट आज के समय में हमारे जीवन का वह हिस्सा बन चुका है जिसे अगर हमारी दिनचर्या से हटा दें तो हमारा जीना मुश्किल हो जायेगा। वेब क्या है ये तो आप सब जानते होंगे पर क्या आप जानते हैं के वेब के तीन हिस्से होते हैं।

आज के आधुनिक युग में दुनिया भर में बहुत सारी चीजें हैं कुछ अच्छी और कुछ बुरी। पर कुछ चीजें हैं जो इसी समाज को नष्ट करने की काबिलियत रखती है और इसीलिए इस दुनिया से छुपा कर रखी गयी हैं। इन चीजों के बारे में नहीं जानना भी एक तरह से गलत होगा क्योंकि हमारे पास कोई जानकारी नहीं होगी के इस इंटरनेट की दुनिया में क्या सही है और क्या गलत ?

डार्क वेब ! रहस्यमयी सतह भरी दुनिया (Dark web secret layered World)

दोस्तों जब हम इंटरनेट के बारे में सोचते हैं तो हमे लगता है हमारे रोज के काम जैसे के वीडियो देखना (video), न्यूज़ चेक करना (news check), ऑनलाइन बुकिंग (online booking), सोशल मीडिया (social media) इस्तेमाल करना बस यही होता है। यह सिर्फ वो दुनिया है जो आप सतह पर देखते हैं।

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इस सतह पर दिखने वाली इंटरनेट की दुनिया के निचे इससे भी बड़ी गहरी इंटरनेट की दुनिया है जिसके बारे में बहुत कम लोगो को ही पता है। जी हाँ आपको यह जानकार हैरानी होगी कि जो इंटरनेट हम इस्तेमाल करते हैं, देख पाते हैं वह पुरे इंटरनेट कि दुनिया का सिर्फ 4% है यानि 96% इंटरनेट के बारे में हम नहीं जानते हैं और ना ही उसका इस्तेमाल कर पाते हैं। तो दोस्तों आपका समय व्यर्थ ना करते हुवे आईये आपको इस डार्क वेब ! रहस्यमयी सतह भरी दुनिया (Dark web secret layered World) से अवगत करवाता हूँ

डार्क वेब ! रहस्यमयी सतह भरी दुनिया (Dark web secret layered World)

वेब के प्रकार (types of web)

  • सरफेस वेब (Surface Web) इसे वर्ल्ड वाइड वेब World Wide Web (www) भी कहा जाता है।
  • डीप वेब (Deep Web) या हिडन वेब (Hidden Web)
  • डार्क वेब (Dark Web) या डार्क नेट (Dark Net)
वेब के प्रकार (types of web)

सरफेस वेब (Surface Web) या वर्ल्ड वाइड वेब (www)

जैसा की इसके नाम से ही पता चलता है यह इंटरनेट की सबसे ऊपरी सतह है यानि के वो सतह जो हर किसी को दिखाई देती है। यानि हम जो रोज की दिनचर्या में इंटरनेट (internet) इस्तेमाल करते हैं वह सरफेस वेब (Surface Web) या वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web) www है।

हम गूगल क्रोम (Google Chrome) या फायर फॉक्स (Fire Fox) और इंटरनेट एक्स्प्लोरर (Internet Explorer) ब्राउज़र (browser) के सर्च इंजन (search engine) से जो भी सर्च (search) करते हैं हमे उसका रिजल्ट लिंक (link) के रूप में मिल जाता है। हम अपनी पसंद की लिंक (link) पर क्लिक (click) करते हैं और हमे जो भी जानकारी चाहिए होती है हम पढ़ लेते हैं। यह हम बड़ी ही आसानी से कर लेते हैं परन्तु डीप वेब (deep web) और डार्क वेब (dark web) में ऐसा बिलकुल नहीं है। 

 

सरफेस वेब (Surface Web) या वर्ल्ड वाइड वेब (www)

डीप वेब (Deep Web)

डीप वेब (deep web) भी वर्ल्ड वाइड वेब (www) का ही एक हिस्सा है परन्तु इसे हम सभी लोग एक्सेस (access) या इस्तेमाल नहीं कर सकते। इसको सिर्फ वही लोग एक्सेस (access) कर सकते हैं जिनको इसका एक्सेस (access) दिया गया हो यानि के उनके पास इसे इस्तेमाल करने की अनुमति हो।

जैसे की किसी बैंक, रेलवे, हॉस्पिटल या यूनिवर्सिटी का कोई इंटरनेट लिंक (Internet link) जिसे हम सभी एक्सेस (access) नहीं कर सकते परन्तु उस बैंक, रेलवे, हॉस्पिटल या यूनिवर्सिटी के कर्मचारी कर सकते हैं क्योकि उनके पास इसका एक्सेस (access), यूजरनेम और पासवर्ड (username and password) होता है।

यदि आम इंसान उस लिंक (link) को अपने ब्राउज़र में खोलने की कोशिश करे तो वह नहीं खुलेगा और यदि खुल भी गया तो उसे इस्तेमाल करने के लिए आपके पास यूजरनेम और उसका पासवर्ड होना चाहिए जो की आम इंसान के पास नहीं होगा। डार्क वेब (Dark Web) इससे पूर्णतः अलग है। 

डीप वेब (Deep Web)

डीप वेब (Deep Web) का इस्तेमाल कहाँ और क्यों होता है?

अब आप सोच रहे होंगे कि डीप वेब (Deep Web) का इस्तेमाल कहाँ और क्यों होता है? इंटरनेट पर कुछ ऐसी चीज़े होती हैं जो बहुत ही गोपनीय (secret) होती हैं जिसे सबसे छुपा कर रखा जाता है क्योकि उनका गूगल सर्च रिजल्ट (google search result) में आने की कोई जरुरत नहीं होती है इसीलिए इन जानकारियों (contents) को डीप वेब (Deep web) के इस्तेमाल से छुपा दिया जाता है।


उदाहरण के तौर पर मैं आपको यह बताना चाहूंगा कि मान लीजिये आपका ऑनलाइन बैंकिंग अकाउंट (online banking account) है और अगर वह नार्मल गूगल सर्च रिजल्ट (normal google search result) में आ जाये तो आपको कितनी हानि हो सकती है यह आप स्वयं सोच सकते हैं।

इसीलिए आपके ऑनलाइन बैंकिंग इन्फॉर्मेशन (online banking information) को सबसे छुपाने के लिए बैंक द्वारा डीप वेब (deep web) का इस्तेमाल किया जाता है ताकि आपके अकाउंट (account) का ऑनलाइन इस्तेमाल सिर्फ आप ही कर सकें। इसीलिए आपको यूजरनेम और पासवर्ड दिया जाता है।

 डीप वेब (Deep Web) का इस्तेमाल कहाँ और क्यों होता है?

डार्क वेब (Dark Web) या डार्क नेट (Dark Net)

डार्क वेब (Dark Web) वास्तव में U.S Government (अमरिकी सरकार) द्वारा जासूसों (Spy) और वहाँ की सेना (Military) को पूरी तरह से गुमनाम रूप से सूचनाओं का आदान-प्रदान करने के लिए बनाया गया था ताकि वो सूचनाएं किसी और के हाँथ ना लगें।

अमेरिकी सैन्य शोधकर्ताओं (U.S Military Research) ने 1990 के दशक के मध्य में टॉर द ओनियन राउटर (TOR -THE ONION ROUTER) के नाम से जानी जाने वाली तकनीक विकसित की। किसी तरह यह तकनीक वहाँ से लीक (leak) हो गयी और पब्लिक डोमेन में आ गयी और इसका गलत इस्तेमाल होना शुरू हो गया।

इसका कारण यह था कि अब वे गुमनाम रह सकते थे – उन्होंने सोचा यदि हजारों अन्य लोग कई अलग-अलग चीजों के लिए एक ही प्रणाली का उपयोग कर रहे हों तो अन्य संदेशों और जासूसी संदेशों के बीच सरकार के संदेशों को छुपाना आसान होगा ।टॉर अब लगभग 30,000 छिपी हुई वेब साइट्स को होस्ट करता है।

आजकल इसका उपयोग गैरकानूनी हथियारों  की तस्करी (Weapons business), ड्रग्स का कारोबार (Drugs business), पायरेसी (Piracy), हवाला आदि कार्यो के लिए हैकर्स और गैरकानूनी लोगो द्वारा किया जाता है।


इसे द ओनियन राउटर (TOR- THE ONION ROUTER) कहा जाता है, क्योंकि यह प्याज की राउटिंग की तकनीक का उपयोग करता है – वेबसाइटों को एन्क्रिप्शन (encryption) की परतों के माध्यम से गुमनाम बनाता है। अधिकांश वेबसाइटें ओनियन (onion) डोमेन पर भी होस्ट की जाती हैं।

डार्क वेब (Dark Web) या डार्क नेट (Dark Net)

डार्क वेब (Dark Web) या डार्क नेट (Dark Net) की कुछ अन्य बातें

  • डार्क वेब (Dark Web) या डार्क नेट (Dark Net) की कोई भी वेब साइट (website) आपको नार्मल (normal) इंटरनेट सर्च से नहीं मिलेगी और ना ही कोई भी वेब साइट गूगल क्रोम (google chrome), फायर फॉक्स (Fire fox), इंटरनेट एक्सप्लोरर (Internet Exploere) जैसे ब्राउज़र में खुलेगी।
  • आप कितनी भी कोशिश कर लें आपको कामयाबी नहीं मिलेगी।
  • डार्क वेब (Dark Web) या डार्क नेट (Dark Net) की वेब साइटों को खोलने (open) के लिए एक खास तरह का ब्राउज़र बनाया गया है जिसका नाम है टॉर ब्राउज़र (TOR BROWSER)
  • मैं आपको यह भी बताना चाहूंगा कि इसकी वेब साइट्स डॉट कॉम (.com) की जगह डॉट ऑनियन (.onion) के नाम से होती हैं। जैसे फेसबुक की भी अनियन (onion) वेबसाइट है https://www.facebookcorewwwi.onion/ जो की नार्मल ब्राउज़र में नहीं खुलेगी सिर्फ टॉर में ही खुलेगी।
  • अपनी जानकारी के लिए आप (TOR BROWSER) टॉर ब्राउज़र की वेब साइट से जानकारी हासिल कर सकते हैं।
 डार्क वेब (Dark Web) या डार्क नेट (Dark Net) की कुछ अन्य बातें

डार्क वेब (Dark Web) में TOR क्या है?

हम अपने आप को इंटरनेट पर अनजान (anonymous) रखने के लिए VPN (Virtual Private Network) का प्रयोग करते हैं। किसी भी वेबसाइट को अगर हम बिना VPN के किसी भी ब्राउज़र जैसे गूगल क्रोम (google chrome), फायर फॉक्स (Fire fox) और इंटरनेट एक्स्प्लोरर (internet explorer)में open करें तो सरकारी संस्थाएं (Government agencies), पुलिस, साइबर क्राइम और हमारे internet provider को हमारा पता लगाने में बहुत ही आसानी होगी क्योंकि हमारा IP address उस वक़्त गोपनीय (anonymous) नहीं होगा। वही काम हम अगर VPN के जरिये करें तो हम खुदको एक हद तक इंटरनेट पर गोपनीय (anonymous) रख सकते हैं और हमारा IP address छुपा रह सकता है।

डार्क वेब (Dark Web) में TOR भी एक तरह का VPN है परन्तु इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह एक मकड़ी के जाल जैसा है और इसमेंVPNs का भण्डार है। सामान्यतः हम अपने ब्राउज़र में यदि gmail टाइप करते हैं तो वह बिना किसी जरिये के gmail के server से हमे gmail की जानकारी सर्च रिजल्ट (search result) के रूप में दे देता है। यही gmail अगर हम VPN के जरिये खोलना चाहे तो हमारी दी हुई command पहले VPN के सर्वर में जाएगी और VPN हमारी पहचान छुपा कर gmail के सर्वर से जानकारी लेकर हमे सर्च रिजल्ट (search result) के रूप में देगा।

डार्क वेब (Dark Web) में TOR क्या है?

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टॉर (TOR) नाम क्यों दिया गया?

टॉर – द अनियन राऊटर (TOR -THE ONION ROUTER) जैसा कि इस नाम को सुनते ही आपके मन में प्याज का चित्र उभर का आता होगा। जी हाँ अगर आता है तो आपका अंदाज़ा बिलकुल सही है। यह प्याज के सिद्धांत पर ही काम करता है जैसे के एक प्याज़ में बहुत सारी परतें (layers) होती हैं वैसे ही इसमें भी कई सारी परतें (layers) होती हैं। जिस तरह प्याज़ के अंदर जाने के लिए आपको कई सारी layers से गुजरना पड़ता है ठीक उसी तरह TOR भी काम करता है इसीलिए इसे ट्रैक करना, पकड़ पाना, इसमें चल रहे काम को ट्रेस कर पाना मुश्किल है। इसकी इसी खूबी की वजह से इसे TOR नाम दिया गया।

टॉर (TOR) नाम क्यों दिया गया?

डार्क वेब (Dark Web) कैसे काम करता है?

जैसा के मैंने बताया TOR एक मकड़े के जाल जैसा है। जब हम इसमें कोई भी डाटा (data) सर्च करते हैं तो उस डाटा (data) के सर्वर तक पहुँचने से पहले उसे बहुत सरे VPNs से होकर गुज़रना पड़ता है। हर VPN हमारा लोकेशन और हमारी पहचान दोनों बदलता है। इसका मतलब अगर हमारा डाटा 10 VPNs से होकर गुजरा है तो टारगेट सर्वर (target server) को 10 लोकेशन और 10 पहचान दिखेगा जिससे टारगेट सर्वर (target server) को यह पता लगाना मुश्किल होगा के असल में यह डाटा (data) कहाँ पर सर्च किया गया है।


उदाहरण – मान लीजिये A से लेकर Z तक TOR के vpns हैं। तो अगर आपने TOR के जरिये YouTube सर्च किया तो इस सर्च को YouTube के सर्वर तक पहुँचने के लिए A – Z सारे vpns से होकर जाना होगा। अंदाज़ा लगाए तो 26 x 26 = 676 vpns से गुजरते हुवे YouTube से जानकारी आपतक पहोचेगी। तब YouTube के सर्वर (server) को एक ही व्यक्ति के 676 नाम और 676 लोकेशन दिखाई देंगे। आप इस बात से यह अंदाज़ा लगा सकते हैं कि ऐसे में उस व्यक्ति को trace करना कितना मुश्किल होगा।


यही वजह है कि जितने भी हैकर्स होते हैं सभी इसी TOR तकनीक का इस्तेमाल करते हैं ताकि पकड़े ना जा सकें।
मैं आपको यह भी बता देना चाहूंगा कि TOR पर जीतनी भी वेब साइट्स (Web Sites) होती हैं वह सिर्फ उसी व्यक्ति के द्वारा होस्ट (host) की जाती हैं जिसने उन्हें बनाया है। और तो और उन वेब साइट्स को कोई और होस्ट (host) भी नहीं कर सकता क्योंकि वो वेब साइट्स उसी लैपटॉप या कंप्यूटर में होस्ट (host) की जाती हैं जिनमे उन्हें बनाया गया है

डार्क वेब (Dark Web) कैसे काम करता है?

सन्देश आदान-प्रदान की तकनीक

डॉट अनियन (.onion) वाली सभी वेब साइट्स तभी तक एक्टिव रहती हैं जबतक होस्ट लैपटॉप या कंप्यूटर चालू है। हैकर्स इसीलिए अक्सर wifi के इस्तेमाल से TOR का इस्तेमाल करते हैं ताकि काम होते ही वे वहाँ से नौ दो ग्यारह हो जाएँ।


मान लीजिये आप Mr.1 हैं। अब Mr.1 ने tor की मदद से अपने कंप्यूटर या लैपटॉप में कोई xxxxx नाम कि वेबसाइट बनायीं। वेब साइट का नाम सिर्फ Mr.1 को ही पता हैं और Mr. 2 को। Mr.1 ने अपने दिए हुवे समय पर अपना कंप्यूटर चालू किया और उस वेबसाइट को एक्टिव किया। Mr. 2 ने उस वेब साइट को tor की मदद से खोला और जो जानकारी लेनी थी हासिल की। इस दौरान tor ने Mr.2 के Mr.1 तक पहुँचने के बीच Mr.2 के 676 नाम और IP address बदले। तो दोस्तों Mr.2 ने TOR की मदद से डायरेक्ट Mr.1 के कंप्यूटर को उनकी वेबसाइट के जरिये access किया और जो जानकारी उन्हें चाहिए थी उन्हें मिल गयी। जैसे ही Mr.1 ने अपना लैपटॉप या कंप्यूटर बंद किया xxxxx वेबसाइट भी बंद हो जाएगी। क्योंकि xxxxx वेब साइट की होस्टिंग भी Mr.1 के ही लैपटॉप या कंप्यूटर से हो रही थी। इन वेब साइट्स को बंद करवाना नामुमकिन है।


इस बात से आप स्वयं सोच सकते हैं की अब इन 676 नाम और पातों को ढूंढने में जितना वक़्त लगेगा तब तक Mr.1 वहाँ से कहीं और जा चुके होंगे।

सन्देश आदान-प्रदान की तकनीक

सावधानी (Caution)

  • तो दोस्तों ऊपर जीतनी भी जानकारी आप सभी को मैंने दी है कृपया उसका कोई भी गलत इस्तेमाल ना करें।
  • अगर आपने इसका इस्तेमाल अच्छे कार्य के लिए किया तो मेरी जानकारी देने की कोशिश सफल होगी।
  • आप सभी से विनम्र निवेदन है कि इस बात का हमेशा ध्यान रखें, जितना आसान यह पढ़ने में लगा उतना आसान यह है नहीं।
  • यदि गलती से आप tor कि किसी फ़र्ज़ी वेब साइट पर चले गए तो हो सकता है हैकर्स ने वह वेब साइट आपको हैक करने के लिए ही बनायीं हो तब आपके क्प्म्पुटर के हैक होने की संभावना है।

 

  • tor के अंदर कभी भी अपनी बैंकिंग id, gmail, Facebook सत्यादि ना खोलें।
  • मैं आपको यह सुझाव दूंगा कि कोई भी डॉट अनियन (.onion) की वेब साइट ना खोलें।
  • TOR ब्राउज़र इस्तेमाल करते वक़्त कोई एक VPN अवश्य चालू कर लें। बिना VPN चालू किये इसका इस्तेमाल ना करें।
  • आपको यह सारी जानकारियां मैंने इसलिए दी ताकि कल को अगर आपसे कोई पूछे के TOR क्या होता है? तो आप आसानी से उत्तर दे सकें।
  • अपने निजी जीवन में कोई भी आपत्ति TOR या डार्क वेब (Dark Web) की वजह से ना लाएँ क्योंकि आपके पीछे आपका परिवार आपसे जुड़ा है।
सावधानी  (Caution)

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संक्षेप में

तो दोस्तों आज हमने इस पोस्ट में Dark web kya hai aur kaise kam karta hai? की जानकारी प्राप्त कि, कुछ रहस्यों को जाना जैसे की सरफेस वेब, डीप वेब, डीप वेब का इस्तेमाल, TOR क्या है?, टॉर नाम क्यों दिया गया?, TOR कैसे काम करता है? इत्यादि

दोस्तों, मैं आशा करता हूँ कि आपको यह Dark web kya hai aur kaise kam karta hai? post पसंद आया होगा | अगर आपके पास इस post के सम्बन्ध में कोई सवाल या सुझाव हो तो नीचे comment करके जरूर बतायें और इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ Social Media पर जरूर शेयर करें |

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20 Comments

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